अज्ञा खबर
जनकपुरधाम
धान उत्पादनमे अग्रणी मानल जाएवाला तराई–मधेस प्रदेशमे ऐ वर्षक रोपनी सिजन निराशाजनक रहल अछि। बरसात नहि भेलाक कारण मधेसमे गेल वर्षक तुलना मे लगभग आधा मात्र धान रोपल गेल अछि, ई जानकारी कृषि विभाग देने अछि।
विभागक अनुसार, गेल वर्ष असार २० गते धरि मधेसमे २५.५ प्रतिशत क्षेत्रमे धानक रोपनी भऽ चुकल छल, मुदा ऐ वर्ष एहेन समयमे मात्र १३.६ प्रतिशत क्षेत्रमे रोपनी भेल अछि। कृषि विभागक महानिर्देशक प्रकाश सञ्जेलक अनुसार केवल सीमित एहन क्षेत्र जतए सिंचाइ सुविधा उपलब्ध अछि, ओतए मात्र रोपनी सम्भव भेल अछि। “गेल वर्षक तुलना मे तराई क्षेत्रमे ऐ वर्ष पर्याप्त वर्षा नहि भेलाक कारण रोपनीमे भारी गिरावट देखल गेल अछि,” सञ्जेल कहलनि।
देशभर रोपनीक प्रगति देखल जाए त’ तस्वीर उत्साहजनक नहि अछि। कुल १३ लाख ८७ हजार हेक्टर क्षेत्रफलमे सँ हाल धरि लगभग ५ लाख ८० हजार हेक्टरमे मात्र धानक रोपनी भेल अछि, जे करीब ४२ प्रतिशत होइछ। ई संख्या गेल वर्षक एहेन समयक तुलनामे कम अछि—तखन ४३.५ प्रतिशत रोपनी भेल छल।
प्रदेश स्तर पर देखल जाए त’ सुदूरपश्चिम प्रदेश रोपनीमे सबसँ आगाँ अछि जतए ८२.८ प्रतिशत रोपनी सम्पन्न भेल अछि। कर्णालीमे ७१.७, गण्डकीमे ५५.६, लुम्बिनीमे ५२.१, बागमतीमे ५१.९, कोसीमे २९.५ प्रतिशत रोपनी भेल अछि, मुदा मधेसमे मात्र १३.६ प्रतिशत रोपनी भेल अछि, जे सबसँ कम अछि।
धान उत्पादनक घटैत प्रवृत्तिक कारण खाद्यान्न सुरक्षापर सवाल उठल अछि। परंपरागत खेती प्रणाली, निर्वाहमुखी उत्पादन पद्धति, कमजोर बीजक प्रयोग, असन्तुलित मलखाद, आ सिंचाइक अभावक कारण सँ उत्पादकता वृद्धि रोकायल अछि, एहेन विशेषज्ञ सभक कहब अछि। नेपालक औसत धान उत्पादन प्रति हेक्टर ४.२ मेट्रिक टन अछि, जे दक्षिण एशियाक औसतसँ कम मानल जाएछ।
एतबे नहि, धानक उत्पादन घटला सँ चामलक आयात सेहो बढि गेल अछि। ऐ आर्थिक वर्षमे अमेरिका सँ मात्र २१ करोड १५ लाख रूपैयाक मसिना चामल आयात भ’ चुकल अछि। संगहि फिलिपिन्स, थाइल्याण्ड, जापान, इन्डोनेसिया, इटली, बेलायत, नामिबिया जेकाँ देश सभसँ सेहो चामल आयात कैल गेल अछि।
ई स्थितिक सुधार हेतु सरकार किछु प्रयासमे लागल देखाइछ। आर्थिक वर्ष २०८२/८३ मे तराईक २२ जिलामे चैते धानक उत्पादन बढेबाक लेल ३३ करोड रूपैया लगानी कैल गेल अछि। एहि कार्यक्रमसँ १२ लाख टन धान उत्पादन वृद्धि करबाक लक्ष्य राखल गेल अछि। एखन १ लाख १० हजार हेक्टरमे होमैवाला चैते धान खेतीकेँ विस्तार क’ २ लाख हेक्टर तक ल’ जाएबाक योजना बनाओल गेल अछि।
मुदा दीर्घकालीन समाधानक लेल किसानकेँ उन्नत जातिक बीज, यंत्रीकरण (जेकाँ धान रोपबाक मशीन), रासायनिक मलक भरपर्दो आपूर्ति, आ सिंचाइक समुचित पहुँच सुनिश्चित करब आवश्यक अछि, एहेन विशेषज्ञ सभक मानब अछि। नहि त’ अन्नक भंडारक रूपमे चिन्हल जाएवाला मधेसमे खाद्यान्न संकट आर गहिराएत, एहेन चिन्ता दिन-ब-दिन बढि रहल अछि।
