पशुपति क्षेत्र विकास कोषक सदस्य सचिवमे मुकुन्द शर्मा हुमागाईंक उम्मेदवारी, सात बुँदे सुधार योजना सार्वजनिक

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आज्ञा खबर

काठमाडौं  कालाग्निरुद्रपीठ लड्केश्वर धामक पीठाधीश मुकुन्द शर्मा हुमागाईं पशुपति क्षेत्र विकास कोषक सदस्य सचिव पदक लेल उम्मेदवारी प्रस्तुत केने छथि। संस्कृति, पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मन्त्रालयद्वारा आह्वान कएल गेल रोष्टरमे ओ पशुपति क्षेत्रक आमूल सुधार आ रूपान्तरणक स्पष्ट कार्ययोजनासँ आवेदन देने छथि।

काभ्रेपलाञ्चोकक श्री नरसिंह मठमे आयोजित एक महिनाक धार्मिक अनुष्ठानके सम्बोधन करैत हुमागाईं पशुपति क्षेत्रक नेतृत्व सक्षम, इमानदार आ आध्यात्मिक चेतनासँ युक्त व्यक्तिके देबाक लेल सरकारसँ आग्रह केने छथि। ओ राष्ट्र, धर्म आ संस्कृतिक प्रति समर्पित व्यक्तिके मात्र विकास कोषक जिम्मेवारी देबाक चाही कहैत, योग्य व्यक्ति नहि भेटला पर अपन पूर्वकार्यक मूल्याङ्कन कएक अवसर देबाक लेल सरकारके चुनौती सेहो देने छथि।

हुमागाईं टेलिभिजन कार्यक्रममार्फत देशभरक भक्तजनके एकीकृत कएक विश्वक सभसँ उँच त्रिशूल निर्माण कए चुकल दावा केने छथि। संगहि पूर्वराजा, राष्ट्रपति तथा ७७ गोटे जिल्लाक भक्तजनक सहभागितामे राष्ट्रिय कोटिहोम सम्पन्न कराकएक अपन व्यवस्थापकीय क्षमता प्रमाणित कएने उल्लेख केने छथि।

सदस्य सचिव पदमे नियुक्त भेलाकेबादो अपनाके कोनो प्रकारक तलब, भत्ता आ सरकारी सुविधा नहि लेबाक घोषणा करैत ओ पशुपति क्षेत्र सुधारक लेल सात बुँदे कार्ययोजना सार्वजनिक केने छथि।

ओ कहलनि जे पशुपति क्षेत्र विकास कोषमार्फत पशुपतिनाथ क्षेत्रसँ सदाचार तथा भ्रष्टाचारविरुद्ध अभियान सञ्चालन कएल जाएत, कोषमे आर्थिक अनुशासन आ पूर्ण पारदर्शिता कायम कएल जाएत तथा चढौना भेटीघाटीसँ प्राप्त रकमके केवल धार्मिक, सामाजिक आ परोपकारी कार्यमे खर्च कएल जाएत।

तहिना, पशुपति क्षेत्रक भीतर रहल सम्पूर्ण मन्दिर आ पीठसभमे परम्परागत पूजा प्रणालीके व्यवस्थित बनाओल जाएत, अभिषेकक लेल शुद्ध जलक व्यवस्था कएल जाएत तथा दर्शन व्यवस्थाके आओर सहज आ प्रभावकारी बनाओल जाएत।

आर्थिक तथा नीतिगत सुधार अन्तर्गत अगला तीन वर्षक भीतर विकास कोषके सरकारी बजेट पर निर्भर नहि रहए पड़ए, एहन आत्मनिर्भर बनाबएक लक्ष्य राखल गेल अछि। कोष अन्तर्गतक सम्पत्ति तथा संरचनाक पारदर्शी व्यवस्थापन, सार्वजनिक बोलकबोल प्रक्रियामार्फत भाडा व्यवस्थापन एबंम अनधिकृत असुली नियन्त्रण कएल जाएत, हुमागाईं कहलनि।

सम्पदा संरक्षणक दिशामे भग्नावशेष अवस्थामे रहल शिवालय तथा देवालयसभक पुरातात्त्विक मापदण्ड अनुसार पुनर्निर्माण कएल जाएत, बन्द रहल धर्मशाला तथा सत्तलसभक पुनः सञ्चालन कएल जाएत तथा अतिक्रमित गुठी जमीन फिर्ता आनल जाएत, एहन योजना सार्वजनिक कएल गेल अछि।

तहिना, आर्यघाट, भष्मेश्वर तथा विद्युतीय शवदाह गृहके सेवाग्राहीमैत्री बनाओल जाएत, विपन्न नागरिकक लेल निःशुल्क शवदाह तथा काजकिरिया सेवा उपलब्ध कराओल जाएत तथा धार्मिक पर्यटन प्रवर्द्धनक लेल विश्वभरक हिन्दू तथा गैरआवासीय नेपालीसभके पशुपतिनाथ दर्शनसँ जोड़बाक अभियान सञ्चालन कएल जाएत, एहन प्रतिबद्धता सेहो ओ व्यक्त केने छथि।

हुमागाईं कहलनि जे “भ्रष्टाचारमुक्त, आध्यात्मिक, समृद्ध, व्यवस्थित आ विश्व हिन्दू समाजक गौरवपूर्ण केन्द्रक रूपमे श्री पशुपतिनाथ तथा पाशुपत क्षेत्रक विकास” हुनकर मुख्य लक्ष्य अछि। “सदाचार, सेवा आ सनातन संस्कृतिक संरक्षण–समृद्ध पशुपति, गौरवशाली नेपाल” नाराक संग पशुपति क्षेत्रके विश्वस्तरीय धार्मिक तथा सांस्कृतिक केन्द्रक रूपमे विकास करबाक लक्ष्य ओ आगाँ सारने छथि।

 

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