आइ मधुश्रावणी पावैन समापन भ रहल

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 आज्ञा खबर

महोत्तरी

मिथिला क्षेत्रक नवविवाहिता मिथिलानीसभ आइ मधुश्रावणी पावैन समापन क रहल छैथ। मिथिलामे मौनापञ्चमी कहल जाएबला साओन कृष्ण पञ्चमीक दिन मिथिलानीसभद्वारा शुरू कएल ई पावैन आइ १३म दिन समापन करए लागल छैथ। साओन कृष्ण पञ्चमीक दिन शुरू कएल जाएबला ई पावैन साओन शुक्ल तृतीया तिथिक दिन समापन करबाक परम्परा अइछ।

पति-पत्नी बीच प्रगाढ़ प्रेम सम्बन्धके कामनासँ नवविवाहिता मिथिलानीसभ ई पावैन विवाह भेल वर्षमे मनेबाक चलन अइछ। पतिद्वारा पठाएल जाएबला पूजा सरदाम (सामग्री)सँ ई पावैन मिथिलानीसभ अपन नैहरमे मनाबैत छैथ। पतिद्वारा पठाएल जाएबला सामग्रीमे पावैन अवधिक खाद्य सामग्री, नवका वस्त्र परिधान आ आभूषण होइत अइछ।

मिथिलामे नवविवाहिता वधु साओन कृष्ण पञ्चमीसँ साओन शुक्ल द्वितीयाधैर व्रत विधानमे रइह क १२म दिनक राइत बामा ठेहुनमे ‘टेमी’ ल क दोसर दिन तृतीयाक दिन पावैन सम्पन्न करबाक परम्परा अइछ। ‘टेमी’ दागल ठाममे फोका उठलापर पति-पत्नी बीच प्रेम सम्बन्ध अत्यन्त गहिर होबाक विश्वास रहल भङ्गाहा–३ की अइ वर्षीया रञ्जु कर्ण बतौलैन। पछिला किछु समयसँ नवका पुस्ताक मिथिलानीसभ ‘टेमी’ के सट्टा शीतल चन्दनके लेप लगेबाक प्रचलन शुरु कएने अइछ।

‘टेमी’केँ परिष्कृत कएल गेल नवका चलन उपयुक्त रहल शिक्षण पेशामे रहल गौशाला–१२ के सुनिता महतोक कहब अइछ। ‘टेमी’ विधि घर परिवारक सबसँ श्रेष्ठ महिलाक हाथसँ करेबाक चलन अइछ। पावैन अवधिभैर भगवान् शङ्कर, देवी गौरी (पार्वती) आ विषहरा (नाग देवता) क आराधना कएल जाइत अइछ। पर्वमे बस्तीभैरके नवविवाहित जमा भ क हास-परिहास आ सामूहिक गायनमे रमैत छैथ।

ई पर्वमे पवनौतिन आ हुनकर सखीक वस्त्र परिधानक सइजधक्षजक, सामूहिक प्रणयगान आ ‘फूललोढी’ विधिसभ सबहक ध्यान खींचैत अइछ। शिव, पार्वती (गौरी) आ विषहराक आराधना कएल जाएबला अइ पावैनमे दोसर दिनके पूजा-अर्चनाक लेल एक दिन पहिने साझमे सामूहिक रूपमे फूल लोढ़बाक विधिके ‘फूललोढी’ कहल जाइत अइछ। भगवान् शङ्कर आ गौरीकेँ फूल चढ़ेबाक चलन अइछ। पावैन समापन भेलाक बाद पूजा कएल गेल बेलपत्र आ फूलके नदी वा पोखैरमे विसर्जन करैत छैथ। एहि पावैनके मुख्य उदेश्य पति-पत्नी बीच सुमधुर प्रेम सम्बन्ध भेलासँ अइसँ मैथिली संस्कृति आ पारिवारिक सद्भाव वृद्धिमे सहयोग पहुँचल मैथिली लोक संस्कृतिक जानकार मटिहानी स्थित याज्ञवल्क्य लक्ष्मीनारायण विद्यापीठ (संस्कृत क्याम्पस) क मैथिली भाषा साहित्यक उपप्राध्यापक मनोज झा मुक्ति बतौलैन। पहिने मिथिलाक ब्राह्मण, कायस्थ, देव आ सोनार जातिके महिला मात्र करैत आएल ई पावैन आब सबहक भ चुकल अइछ।

फरक भाषा, संस्कृति आ परम्पराक समुदायक मिश्रित बसोबाससँ एक-दोसरक पावैन-तिहार अपनेबाक चलन बइढ़ रहल अइछ। ताहि लेल पछिला समयमे मधुश्रावणी मिथिलाक साझा पावैन बनैत गेल जलेश्वर–५ चौरियाबासी शिक्षक नायडु तिवारी बतौलैन। (रासस)

 

 

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