आज्ञा खबर
जनकपुरधाम
पर्सा राष्ट्रिय निकुञ्जमे बाघके सङ्ख्या बढ़लाक बाद संरक्षण व्यवस्थापनकेँ अन्तर्राष्ट्रिय मापदण्ड अनुकूल बनेबाक लेल बाघ संरक्षणक लेल सुनिश्चित व्यवस्थापन अन्तर्राष्ट्रिय मापदण्ड (सिए टिएस) प्रमाणीकरण प्रक्रिया सुरु भेल अइछ । सन् २०२२ मे ४१ वयस्क बाघ रहल पर्सा निकुञ्जमे सन् २०२६ के गणनाअनुसार बाघके सङ्ख्या ७१ पहुँचलाक बाद संरक्षण उपलब्धीकेँ दीर्घकालीन आ गुणस्तरीय व्यवस्थापनमे रूपान्तरण करबाक लेल सिए टिएस प्रक्रिया आगु बढ़ाएल गेल अइछ ।
इएह क्रममे राष्ट्रिय निकुञ्ज तथा वन्यजन्तु संरक्षण विभागद्वारा पर्सा राष्ट्रिय निकुञ्जमे सम्पन्न सिए टिएस कार्यशालामे विभागक वरिष्ठ इकोलोजिष्ट हरिभद्र आचार्य, निकुञ्जके प्रमुख संरक्षण अधिकृत रामचन्द्र खतिवडा, जेडएसएल नेपाल, मध्यवर्ती क्षेत्र व्यवस्थापन समिति, सुरक्षा निकाय, निकुञ्जके कर्मचारी, उपभोक्ता समिति तथा स्थानीय सरोकारवालाके सहभागिता छल । कार्यशालामे सिए टिएसके प्रारम्भिक तैयारी, स्वमूल्याङ्कन, व्यवस्थापन सुधार, प्रमाण सङ्कलन तथा सरोकारवाला बीच समवंयके विषयमे परामर्श भेल पर्सा राष्ट्रिय निकुञ्जके प्रमुख संरक्षण अधिकृत रामचन्द्र खतिवडा जानकारी देलैन ।
कार्यशालामे वरिष्ठ इकोलोजिष्ट आचार्य बाघके सङ्ख्या बढ़नाइ मात्रे पर्याप्त नै होबाक कारण ओकरा लम्बा समयधैर कायम राखबाक लेल बासस्थान, आहार, सुरक्षा तथा समग्र व्यवस्थापनके गुणस्तरमे निरन्तर सुधार आवश्यक रहल बतौलैन । सिए टिएस बाघके सङ्ख्या मात्रे नै भ बाघ संरक्षणक लेल आवश्यक समग्र व्यवस्थापन प्रणालीकेँ अन्तर्राष्ट्रिय मापदण्डके आधारमे मूल्याङ्कन करबाक कारण पर्साके लेल ई महत्वपूर्ण अवसर भेल ओ बतौलैन । निकुञ्जके प्रमुख संरक्षण अधिकृत खतिवडा सन् २०२२ सँ २०२६ धैर पर्सामे बाघके सङ्ख्या ४१ सँ बइढ़ क ७१ पहुँचल अइछ । अइसँ संरक्षणके महत्वपूर्ण उपलब्धी भेलाक बादो आबके चुनौती बाघ सङे स्थानीय समुदायकेँ सुरक्षित राखनाइ रहल बतौलैन ।
संरक्षणसँ स्थानीय समुदाय प्रत्यक्ष लाभ होबाक वातावरण निर्माण करबाक आवश्यक रहल ओ उल्लेख केलैन । हुनक कहब अनुसार निकुञ्जके ‘बाघ मित्र अभियान’केँ सिए टिएस प्रक्रियासँ जोइड़ क मानव–बाघ सहअस्तित्व, समुदायके सुरक्षा, सचेतना तथा सहभागिताकेँ थप प्रभावकारी बनाओल जा सकैय । कार्यशालामे सहभागी सरोकारवाला सिए टिएसकेँ निकुञ्ज प्रमाणपत्र प्राप्त करबाक प्रक्रियाके रूपमे मात्रे नै भ निकुञ्ज, मध्यवर्ती क्षेत्र, सुरक्षा निकाय, संरक्षण साझेदार तथा स्थानीय समुदायके साझा अभियानक रूपमे आगु बढ़ेबाक लेल जोड़ देल गेल छल । सिए टिएस बाघके सङ्ख्या मात्रे नै भ बासस्थान, आहार, सुरक्षा, व्यवस्थापन, वैज्ञानिक अनुगमन, समुदायके सहभागिता, मानव–बाघ द्वन्द्व, पर्यटन तथा बाघके दीर्घकालीन अवस्थालगायत विषयके समग्र मूल्याङ्कन करबाक काज करत ।
आब दर्ता, स्वमूल्याङ्कन, सुधार योजना निर्माण, अनुपालनसम्बन्धी दस्तावेज तैयारी, राष्ट्रिय समीक्षा, स्वतन्त्र मूल्याङ्कन तथा अन्तरराष्ट्रिय निर्णयधैरके प्रक्रिया आगु बढ़ाएलल जाएत । अइ क्रममे बासस्थान तथा आहार संरक्षण, चोरी–सिकार नियन्त्रण, स्मार्ट पेट्रोलिङ, मानव–बाघ द्वन्द्व व्यवस्थापन, वैज्ञानिक अनुगमन तथा समुदाय सहभागिताकेँ प्राथमिकता देबाक प्रमुख संरक्षण अधिकृत खतिवडाके कहब छैन । बाघके सङ्ख्या बढ़ल अवस्थामे सिए टिएस प्रमाणीकरण प्रक्रिया पर्सा राष्ट्रिय निकुञ्जके संरक्षण व्यवस्थापनकेँ थप वैज्ञानिक, व्यवस्थित आ अन्तर्राष्ट्रिय मापदण्ड अनुकूल बनेबाक लेल सहयोग होबाक अपेक्षा कएल गेल अइछ । (रासस)
