आज्ञा खबर
बर्दिवास
मधेश प्रदेशक पूर्वमुख्यमन्त्री सरोजकुमार यादवक निजी सचिव चन्देश्वर महतोक नियुक्ति प्रक्रियापर अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग (अख्तियार) द्वारा कड़ा कदम उठाओल गेल अछि। शैक्षिक योग्यता पूरा नहि भेला पर अख्तियार महतोसँ प्राप्त वेतन, सेवा-सुविधा आदिक वापसी हेतु प्रदेशक मुख्यमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालयके पत्राचार केलक अछि।
सूचना अनुसार, अख्तियार करीब दुई सप्ताह पूर्व एक टा निर्देश सहित पत्र पठा क’ महतो द्वारा लैत रहल रकम आ सेवा स्पष्ट रूपसँ उल्लेख करबाक आदेश देलक अछि। महतो पूर्वमुख्यमन्त्री यादवक कार्यकालमे प्रथम श्रेणी (सहसचिव स्तर)क ‘प्रमुख निजी सचिव’ पदपर नियुक्त भेल छलाह। मुदा, एहि पदक लेल न्यूनतम शैक्षिक योग्यता स्नातक तह चाही, जखन कि महतोसँ सिर्फ प्रविणता प्रमाणपत्र (PCL) धरि पढाई कएल गेल अछि।
छानबिन उपरान्त अख्तियार एतबा निष्कर्ष पर पहुँचलक जे महतोक नियुक्ति प्रक्रिया शैक्षिक योग्यता पूर्ण नहि छल। महतो करीब १० मास धरि ओहि पदपर रहलाह आ मासिक ५७ हजार ७ सय ८७ रूपैयाँ वेतनक संग सरकारी गाड़ी, आवास आदि सुविधा उपभोग कएलन्हि, जे अख्तियारक रिपोर्टमे उल्लेखित अछि।
मुख्यमन्त्री तथा मन्त्रिपरिषद् कार्यालयक सूचना अधिकारी जयकुमार राउत अख्तियारक पत्र प्राप्त होयबाक पुष्टि केलन्हि। हुनकर अनुसार, अख्तियार द्वारा देल गेल निर्देशन अनुसार सेवा सुविधा वापसीक प्रक्रिया अगाडि बढ़ाओल जायत।
दोसऱे दिस, चन्देश्वर महतो दावा करैत छथि जे ओ अख्तियारक निर्देशनसँ अवगत नहि छथि। हुनका अनुसार, अहि विषयमे कोनो पत्र ओतय धरि प्राप्त नहि भेल अछि। “प्रमुख निजी सचिव राजनीतिक नियुक्ति होइत अछि,” महतो कहला, “हम अख्तियारमे अपन पक्ष प्रस्तुत क’ चुकल छी।”
मुदा, कानूनी दृष्टिकोणसँ जे न्यूनतम योग्यता — स्नातक तह — अनिवार्य मानल जाइत अछि, से महतोक शैक्षिक योग्यता पूरा नहि करैत अछि।
ईहो जानकारी भेटल अछि जे पूर्वमे अख्तियार जब महतोक नियुक्तिक सम्बन्धमे जानकारी मागने छल, तखन मुख्यमन्त्री कार्यालय कहने छल जे नियुक्तिक अधिकार स्वयं मुख्यमन्त्रीक होइत अछि आ से कारण हस्तक्षेप नहि कएल जा सकैत अछि।
विश्लेषक सभक कहब अछि – “ई प्रकरण स्पष्ट करैत अछि जे राजनीतिक पहुँचक आधारपर शैक्षिक मापदण्डकेँ नजरअंदाज क’ नियुक्ति होब एकर कानूनी आ नैतिक दूनू स्तरपर गम्भीर प्रश्न उठबैत अछि।”
अब मुख्य प्रश्न उठैत अछि – की पूर्वमुख्यमन्त्री यादव अहि नियुक्तिक जिम्मेदारी लेताह?
नियुक्ति प्रक्रिया, योग्यताको अवहेलना, आ सेवा-सुविधाक वापसी – ई सब बिन्दु अब मधेश प्रदेश सरकार आ अख्तियारक बीच स्पष्ट रूपसँ समन्वय क’ समाधान करबाक आवश्यकता अछि। ई घटनाक आधारपर भविष्यमे राजनीतिक नियुक्तिक नामपर होइत मनमानीपर रोक लगत, एहन अपेक्षा कएल जा रहल अछि।





































