आज्ञा खबर
काठमाण्डू
प्रत्येक साल आषाढ शुक्ल एकादशीक दिन घर घरमे तुलसीके गाछी लगा क चाइर महिनाधैर कएल जाएबला विशेष पूजा आराधना आइसँ शुरू भ रहल अइछ । एक महिना पहिने ज्येष्ठ शुक्ल एकादशीक दिनमे घरके तुलसी मठमे राखल गेल दलके गाछी आइ मठमे रोपल जाइत छै ।
सनातन वैदिक परम्परा अनुसार तुलसीकेँ विष्णुके प्रतीकके रुपमे मानल जाइ छै । आषाढ शुक्ल एकादशीसँ कार्तिक शुक्ल एकादशीधैर चाइर महिना भगवान् विष्णु क्षीरसागरमे शयन करबाक मान्यता अनुसार आजुक दिनके हरिशयनी एकादशी कहल गेल धर्मशास्त्रविद् एवम् नेपाल पञ्चाङ्ग निर्णायक विकास समितिक पूर्व सदस्य प्रा डा देवमणि भट्टराई बताैलैन ।
एक सालमे २४ एकादशी होइत छै। हरिशयनी एकादशीक अवसरमे भोरेसँ राजधानीके बूढानीलकण्ठ, उपत्यकाके चाइर नारायण सहित देशभैर विष्णु मन्दिरमे भक्तजनके भीड लागैत अइछ । वैज्ञानिक रुपमे बेसी अक्सीजन दयबला तुलसी विभिन्न रोगमे दवाइके रुपमे सेहो प्रयोग कएल जाइ छै। वास्तु दोष भेल स्थानमे तुलसीके मठ रहलासँ सकारात्मक फल प्राप्त होबाक मान्यता सेहो अइछ । तुलसी भेल स्थानमे शुद्ध हावा प्रवाह होइत अइछ ।
चार महिनाधैर विधिपूर्वक पूजा आराधना कएल गेल तुलसीकेँ कार्तिक शुक्ल एकादशी अर्थात् हरिबोधिनी एकादशीक दिन दामोदरसँ विवाह करेबाक वैदिक विधि अइछ । तुलसी आ दामोदरके विधिपूर्वक विवाहके बाद अग्निस्थापना विधिसँ चतुर्मासा व्रतके उद्यापनक लेल हवनसमेत कएल जाइत छै ।
