आज्ञा खबर
महोत्तरी
सरकार द्वारा चालु आर्थिक वर्षक बजेट में उखु किसान सभकेँ देल जाएवाला प्रति क्विन्टल ७० रुपैया अनुदान हटेबाक निर्णय सँ किसान सभ बहुत आक्रोशित भ’ गेल छथि। आइतवार महोत्तरी जिलाक उखु किसान सभ प्रमुख जिल्ला अधिकारीक माध्यम सँ प्रधानमन्त्री केँ ज्ञापनपत्र द’ एहन निर्णय वापिस लेबाक माँग केलनि।
उखु उत्पादक कृषक संघ महोत्तरीक अध्यक्ष नरेशसिंह कुशवाहा आ उखु उत्पादक कृषक महासंघक केन्द्रीय सदस्य महाशंकर थिङक नेतृत्व में सौ सँ बेसी किसान जिला प्रशासन कार्यालय पहुँचने रहथि। सहायक प्रमुख जिल्ला अधिकारी सञ्जयकुमार पोखरेल केँ ज्ञापनपत्र दैत किसान सभ चेतावनी देलनि – “जँ हमर माँग नहि मानल गेल, तँ आन्दोलन क्रमबद्ध रूप सँ तेज होएत।”
ज्ञापनपत्रक शुरूआत में कहल गेल अछि, “गत आर्थिक वर्ष ०८१–८२ में उखुक अनुदानक रूप में सरकार करीब १ अर्ब ६० करोड रुपैया के भुक्तानी नहि केलक। चालु वर्षक बजेट में ओहि बात केँ अनदेखी करैत उल्टे अनुदानए हटाओल गेल अछि।”
सरकार मुनाफा में, किसान घाटा में?
किसान सभ द्वारा देल गेल आर्थिक तर्क खास ध्यान देबाक जोग अछि। ज्ञापनपत्र अनुसार, चिनी आ छुवाक बिक्री सँ सरकार वार्षिक ३ अर्ब सँ बेसी भ्याट (VAT) संकलन करैत अछि। ओहि में सँ किसान केँ देल जाएवाला १ अर्ब ६० करोड रुपैया के अनुदान सहज रूप सँ देल जा सकैत अछि – एहेन तर्क देल गेल अछि।
“सरकार केँ किसान सँ घाटा नहि होइत अछि। मुदा किसान केँ घाटा में राखि सरकार मुनाफा कमाए – ई अन्याय थिक,” – ज्ञापनपत्र में कहल गेल अछि।
अनुदान कटौती: डेढ़ दशकक आशा पर बज्रपात
किसान सभक अनुसार, उखुक दाम समय पर नहि भेटब, चिनी मिल सभक ठगी आ सरकारक मौनता सँ हुनकर स्थिति पहिने सँए कमजोर रहल अछि। अहीं में १५ वर्ष सँ भेट रहल अनुदान सेहो हटाओल जाए – ई किसान केँ आंदोलन करबा लेल बाध्य क’ देलक अछि।
हरिवन बैठक सँ बनल आंदोलनक रोडम्याप
सावन १२ गते हरिवन में महोत्तरी, सर्लाही, बारा आ सुनसरी जिलाक उखु किसान नेता सभक बैठक भेल छल। ओहि बैठक में तीन चरणक आंदोलनक योजना तय भेल:
-
सावन १८ – जिल्ला प्रशासनक माध्यम सँ प्रधानमन्त्री केँ ज्ञापनपत्र बुझेनाइ (आज सम्पन्न)
-
सावन २० – देश भरिक चिनी मिलक मुख्य गेट पर टायर जराक विरोध प्रदर्शन
-
भादो ८ – काठमांडू माइतीघर मण्डल सँ राष्ट्रीय स्तरक आंदोलन शुरू करब
‘प्रधानमन्त्री सँ आशा बाकी अछि’
ज्ञापनपत्रक अंत में प्रधानमन्त्री प्रति आशा प्रकट कएल गेल अछि: “सम्माननीय प्रधानमन्त्रीजी ०८१–८२ के उखु अनुदानक बकाया रकम अवश्य उपलब्ध करताह – एहेन विश्वास हमरा सभ केँ अछि।”
मुदा किसान नेता सभक मन में अभी सेहो शंका अछि। अध्यक्ष कुशवाहा कहलनि, “जँ सरकार गम्भीरतापूर्वक वार्ता में नहि अबैत अछि, तँ आंदोलन राजधानी धरि विस्तार पाओत।”
कृषि में अनुदान कटौतीक संकेत खतरनाक
पहिने जखन सरकार कृषि में अनुदान बढ़ा क’ किसान केँ प्रोत्साहित करैत छल, ओहिसँ उलट आब अनुदान कटौतीक दिस जाए – ई बात किसानक नजरि में बहुत दुखद अछि। उखु जइसँ दीर्घकालीन निवेश पर आधारित खेती में अनुदान हटाओल जाए – ताहि सँ किसानक मनोबल पर गहिर चोट पहुँचैत अछि।





































