आज्ञा खबर
जनकपुरधाम
तीन मास बीति चुकल अछि, मुदा खेत सभ अभीयो सूखल पड़ल अछि। किसान सभक आँखि आकाश दिस ताकैत अछि। ने पानी, ने सिंचाइ के कोनो उपाय — मधेश प्रदेशक धानक खेत सभ एहि बेरक कठोर खँहरे सँ फाटि चुकल अछि। एहि पृष्ठभूमि मे संघीय सरकार मधेश प्रदेश के आगामी तीन मास के लेल ‘विपद् संकटग्रस्त क्षेत्र’ घोषित केलक अछि।
सरकारक आकस्मिक मन्त्रिपरिषद् बैठक ई निर्णय विपद् जोखिम न्यूनीकरण तथा व्यवस्थापन ऐन, २०७४ केर धारा ३२ अनुसार केलक अछि। आब एहि घोषणा के आधार पर नेपाल राजपत्र मे सूचना प्रकाशित कएल जायत, आ यदि आवश्यक भेल तऽ ई अवधि आरो बढ़ाओल जा सकैत अछि।
एहि सँ पहिने असार २६ गते मधेश प्रदेश सरकार स्वयं सुक्खाग्रस्त क्षेत्र के घोषणा कऽ चुकल छल। मुदा अवस्था सुधरल नहि, बल्कि आरो गंभीर बनैत गेल आ खाद्य सुरक्षाक संकट देखा गेलाक बाद संघीय सरकार सीधा हस्तक्षेप केलक।
धान रोपनी पचास प्रतिशतो नहि भेल
कृषि विभागक पछिला तथ्यांक अनुसार साउन ४ गते तक मधेश मे केवल ४६ प्रतिशत धान रोपनी सम्पन्न भेल अछि। कुल खेती योग्य ३ लाख ७२ हजार हेक्टेयर जमीन मे सँ मात्र १ लाख ७४ हजार हेक्टेयर मे रोपनी भेल अछि। बाकीक खेत बाझ पड़ल अछि — इनार आ ट्यूबेल सुखा चुकल अछि, किसान सभ पानीक खोज मे भटकि रहल अछि।
धनुषा जिलाक एक गोट किसान जयप्रकाश यादव कहैत छथि, “पानी नहि होय सँ बीया सुखा जाय लागल अछि। सरकारक घोषणा सुनिक’ नीक लागल, मुदा व्यवहार मे राहत भेटय चाही।”
तीन स्तरक समन्वय, सचिवस्तरीय बैठक सक्रिय
साउन ५ गते मुख्य सचिवक संयोजकत्व मे भेल सचिवस्तरीय बैठक केंद्र, प्रदेश आ स्थानीय तह बीच समन्वय बढ़ेबाक निर्देश देलक। पीने के पानी, कृषि आ सिंचाइ संबंधी समस्या पर विशेष ध्यान दैत, जिला प्रशासन कार्यालय सभ के सक्रिय बनेबाक निर्णय लेल गेल।
दीर्घकालीन समाधान दिस सरकारक प्रयास
सिर्फ तत्काल राहत तक सीमित नहि रहल सरकारक प्रतिबद्धता देखायल अछि। कृषि तथा पशुपालन विकास मन्त्रालय निर्णय केलक जे तकनीकी टीम के मधेश पठाओल जायत जे दीर्घकालीन समाधान के लेल माटि, पानी स्रोत, सिंचाइ पूर्वाधार आ मौसम के प्रवृत्तिक अध्ययन करत आ प्रतिवेदन देत।
कृषक मे आशा आ आशंका दुनू
सरकारक एहि कदम सँ मधेशक कृषक सभ मे आशाक किरण देखा रहल अछि। मुदा पूर्व घोषणा सभक कार्यान्वयन नहि होबय कारणें कतेको किसान संशय मे छथि। सर्लाही जिलाक किसान सुनिता देवी कहैत छथि, “घोषणा तँ बहुत होइत अछि, मुदा खेत मे पानी कहिया पहुँचत, ई मुख्य सवाल अछि।”
अब चुनौती — राहत के व्यवहार मे अनब
‘संकटग्रस्त क्षेत्र’ केर कानूनी घोषणा सँ राहत आ स्रोत के परिचालन कानूनी रूप सँ सहज भ’ जायत। मुदा सिंचाइ के तुरत समाधान, वैकल्पिक फसल योजना, बीया आ खाद तक पहुँच, किसान के नगद सहायता — ई सभ बात आब सरकारक प्राथमिकता होबाक चाही।
पूर्व सचिव झपट बहादुर भण्डारी के अनुसार, “सरकारक प्रतिक्रिया सही दिशामे संकेत करैत अछि, मुदा ओकर प्रभावकारिता कार्यान्वयन पर निर्भर करैत अछि।”





































