भारतीय कलाकार धीरज कुमारक निधन

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आज्ञा खबर
मुम्बई, भारत

भारतीय मनोरञ्जन उद्योग एक बेर फेरि अपन एक बहुआयामिक आ पुरान हस्ती केँ गुमा देने अछि। वरिष्ठ अभिनेता आ टेलिभिजन निर्माता धीरज कुमारक ७९ वर्षक उमेर मे निधन भऽ गेल अछि। ओतए सँ बलिउड सँ लऽ कऽ टेलिभिजन क्षेत्र धरि शोकक वातावरण छा गेल अछि।

मुम्बई स्थित कोकिलाबेन धीरुभाई अम्बानी अस्पताल मे उपचाररत कुमार किछु दिन सँ निमोनिया सँ पीड़ित छलाह। अस्पतालक स्रोत अनुसार, मंगलदिन भोरुका समय ओ अपन अंतिम सास लेलाह।

पछिला दिन सभ मे शेफाली जरिवाला, कोटा श्रीनिवास राव आ बी. सरोजा देवी जेकाँ कलाकारक निधन सँ मर्माहत भऽ रहल उद्योग, आब धीरज कुमारक अवसान सँ आर बेसी स्तब्ध अछि।

राजेश खन्नाक छायामे उदित भेल एक चमकदार तारा

धीरज कुमारक यात्रा सामान्य सुरुआत नहि छल। सन् १९६५ मे ओ राजेश खन्ना आ सुभाष घाइ संग एकटा प्रतिष्ठित अभिनय प्रतियोगिता मे सहभागी भेल छलाह। ओहि प्रतियोगिता मे राजेश खन्ना विजेता घोषित भेल छलाह, मुदा कुमारक प्रतिभा लोकक नजरि मे आबि गेल, जे हुनका हिन्दी आ पंजाबी सिनेमाजगत मे प्रवेश करबाक मार्ग देलक।

१९७० आ ८० केर दशक कुमारक अभिनय यात्रा लेल स्वर्णयुग बनि गेल। रोटी कपड़ा और मकान, स्वामी, बेजुबान जेकाँ सामाजिक कथावस्तु पर आधारित फिल्मसभ मे ओ अपन छवि एकटा मजबूत अभिनेता केर रूप मे स्थापित कएलाह। संगहि, ओ लगभग दू दर्जन पंजाबी फिल्मसभ मे सेहो अपन प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज केलाह।

टेलिभिजन क्रान्तिक अगुवा: निर्माता रूपी दूरदर्शी

धीरज कुमारक अभिनय यात्रा कतेको वर्ष धरि चलल, मुदा हुनकर दोसर महत्वपूर्ण भूमिका भारतीय टेलिभिजन उद्योग मे रहल। ओ ‘क्रिएटिभ आइ’ नामक प्रोडक्सन हाउसक स्थापना केलाह, जाहि सँ मिली, कहाँ गए वो लोग, मायका, अदालत जेकाँ चर्चित कार्यक्रमसभक निर्माण भेल।

विशेष कऽ अदालत जेकाँ कोर्टरूम ड्रामाक माध्यम सँ कुमार भारतीय दर्शक लेल वैकल्पिक कथानकक नव दिशा खोलि देलखिन। २००० दशकक प्रारम्भ मे हुनकर टेलिभिजन श्रृंखलासभ घर-परिवारक दर्शकमे अत्यंत लोकप्रिय बनल।

कुमारक सोच आ दृष्टिकोण भारतीय टेलिभिजन सामग्री मे व्यावसायिकता आ गुणवत्ता केर अद्भुत संयोजन प्रस्तुत केलक।

बहुआयामिक व्यक्तित्व

धीरज कुमार केवल अभिनेता नहि छलाह — ओ एकटा दूरदर्शी, कथावाचक आ रचनात्मक अगुवो छलाह। अभिनय, लेखन, निर्देशन आ निर्माणक क्षेत्र मे ओ अपन बेहतरीन योगदान देलखिन।

हुनकर रचना मात्र पर्दा पर देखाए वाला दृश्य तक सीमित नहि छल — ओ एकटा एहेन सांस्कृतिक धरोहर निर्माण केलखिन, जे पीढ़ी दर पीढ़ी लोककेँ प्रभावित करत।

शून्यता आ स्मृति

हुनकर निधन सँ एकटा युगक अन्त्य भेल। भारतीय फिल्म आ टेलिभिजन उद्योगक कतेको कलाकार, निर्माता आ दर्शक सभ हुनका श्रद्धाञ्जलि दऽ रहल छथि।

एक वरिष्ठ पत्रकारक शब्द मे —
“धीरज कुमार जेकाँ कलाकार कहियो हराइत नहि छथि, ओ इतिहास मे जीवित रहैत छथि — कहियो टेलिभिजनक पर्दा पर, तऽ कहियो स्मृतिमे।”


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