महोत्तरी डिभिजन बन कार्यालय सऽ जुड़ल सूचना प्रकाशन मे पहुँचवालाक बोलबाला, संरक्षणकर्मी उपेक्षित

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आज्ञा खबर
महोत्तरी

महोत्तरी जिलाक डिभिजन बन कार्यालय मे सूचना प्रकाशन आ प्रसारणक काज “सेटिङ्ग” क अनुसार चलि रहल अछि। बन संरक्षण आ बन क्षेत्रक वास्तविक काज एक दिस अछि, मुदा बन संरक्षण सं जुड़ल सूचना प्रवाह दोसर ढंग सऽ, पहुँचवालाक प्रभाव मे निर्भर देखल जा रहल अछि।

डिभिजन बन अधिकृत (डिएफओ) स्तर सऽ सूचना प्रकाशन आ बजेट व्यवस्थापन पहुँचवाला गोटे क हाथ मे सिमित भऽ गेल अछि। ऐ कारण सऽ जे गोटे सचमे बनक रक्षा करैत अछि, ओ गोटे आ संस्था न त सम्मानित भेल छथि, आ नहिये हुनकर योगदानक कदर भेल अछि।

“जे हमेशा बनक रक्षा करैत छथि, ओ सधैँ ओझरायल रहैत छथि,”—एक स्थानीय बन संरक्षणकर्मी कहलनि। “डिभिजन बन कार्यालय मे सूचना बजटक दुरुपयोग सधैँ होइत रहैत अछि, हमसभ स्थानीय संरक्षणकर्मी आ पत्रकार सब सधैँ उपेक्षित रहैत छी।”

बन संरक्षणक नाम पर जे कार्यक्रम होइत अछि, ताहि क प्रचार-प्रसार सेहो केवल पहुँचवाला गोटे पर केन्द्रित कयल जाइत अछि। स्थानीय बन जोगौनिहार आ एहि क्षेत्रक संचार संस्थासभ के उपेक्षा करब एकटा गंभीर मुद्दा बनि गेल अछि। महोत्तरी डिभिजन बन कार्यालयक हाकिम पर सेहो बन संरक्षण प्रति गम्भीर न होबाक आरोप उठल अछि।

“सूचना बजट अबैत अछि, मुदा ओकर सदुपयोग देखायल नहि जाइत। किछु निश्चित गोटे के लाभ होएबय बला ढंग सऽ प्रचार होइत अछि,”—एक पत्रकार कहलनि।

बन संरक्षण एकटा संवेदनशील आ दीर्घकालीन प्रक्रिया छी, जाहि मे समुदाय, संचार माध्यम आ कार्यालयक बीच समन्वय जरूरी होइत अछि। मुदा महोत्तरी मे देखायल वर्तमान स्थिति ऐ समन्वय मे गंभीर असंतुलन क संकेत दैत अछि।

स्थानीय लोकनि पारदर्शिता, समावेशिता आ परिणाममुखी बन प्रशासनक माँग कय रहल छथि, आ डिभिजन बन कार्यालय सऽ त्वरित रूप सऽ सचेत आ जवाफदेही होयबाक आग्रह कयने छथि।

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