देश भर जनौ पूर्णिमा, ऋषि तर्पणी आ राखी पर्व विधि पूर्वक मनेल जाइ रहल छै — नगर प्रमुख क्षेत्रीद्वारा शुभकामना

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आज्ञा खबर
बर्दिवास

वैदिक सनातन धर्मावलंबी लोकनि प्रत्येक बरख श्रावण शुक्ल पूर्णिमा क’ दिन मनेल जाइत जनौ पूर्णिमा, ऋषि तर्पणी आ राखी पर्व आइ देश भर विधि पूर्वक मना रहल छथि। भोरे सँ श्रद्धालु लोकन नदी, पोखरी, तलाव आ कुण्ड मे स्नान क’ गुरु पुरोहित सँ मन्त्र कएल यज्ञोपवीत आ रक्षासूत्र धारण क’ धार्मिक परंपरा अनुसार पर्व मना रहल छथि।

नेपाल पंचांग निर्णायक समितिक अनुसार राखी क’ उत्पत्ति सतयुग मे दानवराज बली केँ गुरु बृहस्पति द्वारा बाँधि क’ रक्षा कएल पौराणिक कथा सँ जुड़ल अछि। एहि परंपरा अनुसार आइ गुरु पुरोहित लोकनि ‘येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबल…’ मन्त्र उच्चारण क’ जजमानक दाहिना नाड़ी मे रक्षासूत्र बाँधि दैत छथि। एहि दिन ब्राह्मण, क्षत्रिय आ वैश्य समुदायक तागाधारी लोकनि जनौ (यज्ञोपवीत) फेर्नक विधि पालन करैत छथि।

श्रावण शुक्ल चतुर्दशी सँ व्रत कएल तागाधारी लोकनि पूर्णिमा क’ भोरे गोबर, राख, दत्तिउन आ सप्तमृत्तिका सँ स्नान क’ ऋषि तर्पण करबाक परंपरा अछि। अरुंधती सहित आठ ऋषिक पूजा आ तर्पण करबाक कारणे एहि दिन केँ ‘ऋषि तर्पणी’ सेहो कहल जाइत अछि।

एहि अवसर पर एघार प्रकारक दाल–मसूरि मिलाक’ बनायल ‘क्वाँटी’ खेबाक प्रचलन सेहो अछि, जे शरीर केँ बल देत अछि, रोग–प्रतिरोधक क्षमता बढबैत अछि आ वर्षा ऋतु मे ठन्ड़ नहि लगबाक धार्मिक विश्वास अछि। मधेश प्रदेशक मिथिलांचल क्षेत्र मे आइये क’ दिन दिदी–बहिन लोकनि –भाइ केँ राखी बाँधि राखी पर्व मनेबाक परंपरा अछि, जे परस्पर प्रेम आ संबंध केँ मजबूत करबाक मान्यता अछि।

राखी आ जनौ पूर्णिमा पर्वक अवसर पर बर्दिवास नगरपालिकाक नगर प्रमुख प्रह्लाद कुमार क्षेत्री नगरवासीक शुभकामना देलन। प्रमुख क्षेत्री अपन शोकिय सचिव विनोद ढुंगेल मार्फत पठाओल संदेश मे कहलन जे गुरु पुरोहित, अपन–अपन सगा–सम्बन्धी आ मित्र लोकनि सँ जनौ लगेबाक आ राखी बाँधबाक सँ शत्रु सँ रक्षा होइत अछि—ऐ जनविश्वास अछि। ओ कहलन जे रक्षा कवचक रूप मे ल’ गेल ई पर्व दिदी–बहिन आ–भाइ बीचक स्नेह, प्रेम आ संरक्षणक प्रतीक अछि आ नगर अंदर–बाहर रहि रहल सभ हिंदू धर्मावलंबी सहित सम्पूर्ण मानव जातिक सुख, शांति आ समृद्धिक कामना कएलन।

ओ क्वाँटी खेबाक दिन, तामांग समुदाय द्वारा मनेल जाइत ‘गोडे ङ्या’ (ज्ञान दिवस) आ पितृक मुक्तिक लेल संतान द्वारा दिइल जाइत ऋषि तर्पणक अवसर पर सभ पितृ आत्माक बैकुंठ वासक सेहो कामना कएलन।

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