विद्यालय सं अनशन कर’ वला दू शिक्षक के दुसरका दिन, स्थानान्तरण प्रक्रिया पर उठल गंभीर प्रश्न
आज्ञा खबर
सिन्धुली
कमलामाई नगरपालिकाक द्वारा साउन १६ गते कैल स्थानान्तरण निर्णय सिन्धुली जिलाक शिक्षा क्षेत्र में हड़कंप मचा देने अछि। एहि निर्णय स नाखुश दू शिक्षक विद्यालय परिसर में अनशन पर बैसल छथि, आ शिक्षक संगठन सभ सेहो एहि मुद्दा पर दू भाग में विभाजित भ चुकल अछि।
गौमती माध्यमिक विद्यालयक शिक्षक शंकर प्रसाद ढकाल आ नेपाल शिक्षक महासंघ, सिन्धुलीक अध्यक्ष विष्णु प्रसाद फुयाँल अपनासभ पर अन्याय भेल दाबी करैत विद्यालय में अनशन शुरू क चुकल छथि। हुनकर अनुसार स्थानान्तरण में गंभीर त्रुटि भेल अछि आ ओ सभ अपन विरोध अनशन के माध्यम स देखब रहल छथि।
अधिकांश स्थानान्तरण लागू, मुदा दू शिक्षकक अस्वीकार
नगरपालिकाक निर्णय अनुसार १५ टा शिक्षक के स्थानान्तरण भेल छल, जइ में स १३ टा अपन नव कार्यस्थल पर योगदान द चुकल छथि। मुदा बाँकी दू शिक्षक स्थानान्तरण के अस्वीकार करैत प्रतिवाद के रास्ता अपना लेलनि, जे कारणें विवाद तइआर भेल।
ई घटना शिक्षा क्षेत्र में बहस त बढ़ेलक, संगहि शिक्षक संगठन सभ में सेहो विभाजन देखल जा रहल अछि। कियो ई प्रक्रिया के वैध आ सहमति स सम्पन्न कहल जा रहल अछि, त कियो एकरा राजनीतिक दबाब स ग्रसित गलत प्रक्रिया कहि विरोध में उतरि चुकल छथि।
“व्यक्तिगत अनशन छी, संगठन के नहिं” – अरुण कुमार थिङ
नेपाल शिक्षक संघ, सिन्धुलीक अध्यक्ष अरुण कुमार थिङ अनशन के विरोध करैत कहलनि, “ई व्यक्तिगत निर्णय छी, संघक निर्णय नै। स्थानान्तरण पेशागत संघ सभक सहमति स भेल प्रक्रिया छी। एहि के व्यक्तिगत स्तर पर अस्वीकार करब संघीय अनुशासनक विरुद्ध छी।”
थिङ कहलनि जे यदि अनशनक पूर्व सूचना देल गेल रहैत, त संघ एहि विषय पर आंतरिक चर्चा करि क किछु औपचारिक धारणा द सकैत छल।
“बिनु सम्पर्क अनशन अप्ठ्यारू” – गुणविक्रम कुँवर
नेपाल राष्ट्रिय शिक्षक संगठन, सिन्धुलीक अध्यक्ष गुणविक्रम कुँवर, शिक्षक सभक कदम प्रति सजग देखायल। “अनशन स पूर्व शिक्षक सभ पूर्व-संवाद कएल रहित, त स्थिति सहज होइत,” ओ कहलनि। “हम सभ फिलहाल संवाद प्रक्रिया में छी। नगरपालिका आ शिक्षक बीच संवाद होबाक चाही।”
ओ कहलनि जे स्थानान्तरण प्रक्रिया के पारदर्शी बनेबाक, सभ पक्ष के विश्वास में लेबाक आ भविष्य में एहन विवाद न होइ, एकर उपाय खोजल जरूरी अछि।
“राजनीतिक प्रभाव में स्थानान्तरण भेल” – सन्तोष कुमार श्रेष्ठ
एकीकृत अखिल नेपाल शिक्षक संगठन, सिन्धुलीक अध्यक्ष सन्तोष कुमार श्रेष्ठ के तर्क पूर्णतः फराक अछि। हुनकर अनुसार नगर शिक्षा समिति के बैठक में स्थानान्तरण स पूर्व दरबन्दी मिलान के लेल कार्यदल बनेबाक निर्णय भेल छल, मुदा तकरा नजरअंदाज क नगरप्रमुख आ वडाध्यक्ष सभक दबाब में शिक्षक स्थानान्तरण भेल।
“१३ गोटे के सुविधा अनुसार गन्तव्य देल गेल, बाकी दू गोटे अन्याय महसूस क रहल छथि। ई स्थानान्तरण प्रक्रिया में गड़बड़ी के प्रमाण छी,” श्रेष्ठ कहलनि। ओ अनशन पर बैसल शिक्षक सभक न्यायिक मांग पर समर्थन सेहो देलनि।
निष्कर्ष – संवाद कि संघर्ष?
ई घटना स्थानान्तरण प्रक्रिया के पारदर्शिता, विधि, सम्बद्ध पक्षक समन्वय आ शिक्षा में राजनीतिक हस्तक्षेप के बहस के पुनः उजागर क चुकल अछि।
एक दिस नगरपालिका दावा करैत अछि जे प्रक्रिया नियमानुसार पूरा भेल, त दोसर दिस अनशनरत शिक्षक आ किछु संगठन एकरा पक्षपातपूर्ण आ राजनीतिक असर में कएल निर्णय कहि विरोध करि रहल छथि।
अब सवाल उठैत अछि – ई विवाद संवाद स सुलझत कि संघर्ष में बदलत?
नगरपालिका यदि शीघ्र संवाद प्रक्रिया शुरू नै करैत अछि, त विवाद आरो गहराइ स भरि सकैत अछि। दोसर दिस, संगठन सभक बीच में विभाजन स एहन घटना आरो जटिल मोड़ ल सकैत अछि।





































