टूटल मन के जोड़ै वाला टूटेश्वरनाथ मंदिर — धरमी आस्था आ पर्यटनिक संभावना के संगम

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आज्ञा खबर
बर्दिवास

मधेश प्रदेश में प्रसिद्ध धरमी आ ऐतिहासिक स्थल के रूप में जानल जाइ वाला टूटेश्वरनाथ महादेव मंदिर एखने धरमी आस्था के केन्द्र मात्र नै रहल अछि, बल्कि पर्यटनिक आकर्षणक सेहो मुख्य बिंदु बनि गेल अछि। महेन्द्र राजमार्ग स लगभग ७ किलोमीटर उत्तर, महोत्तरी जिलाक बर्दिवास नगरपालिका–५ में स्थित ई मंदिर आब धरमी आस्था मात्र नै, सामाजिक सौहार्द्र आ स्थानीय पर्यटन विकास के प्रतीक रूप में चिन्हाए लागल अछि।

मरहा नदी आ खहरे खोलाक संगम पर बसल ई पौराणिक मंदिर साउन महीनाक प्रत्येक सोमबार हजारों भक्तजन द्वारा जल चढ़ेनाय, पूजा करनाय आ मनोकामना पूर्ति हेतु भाकल करनाय के केन्द्र बनल अछि। श्रद्धालु लोकनि अपन इच्छा पूर्ति के बाद काँवर लऽ कऽ अबैत छथि, लड्डू चढ़बैत छथि, सुन–चाँदी के दान दैत छथि अथवा मंदिर के संरचना निर्माण में सहयोग करैत छथि। एहन धार्मिक क्रियाकलापक परंपरा हाल के वर्षसभ में आरो बढ़ल अछि।

स्थानीय लोकनि कहलनि जे ई स्थल “टूटल मन के जोड़ै वाला टूटेश्वर” केर भावना सं भरल अछि आ अब ई धार्मिक सौहार्द्रक नव प्रतीक बनि रहल अछि। मंदिर परिसर के सफाई, पथ निर्माण, विश्राम गृह, पवित्र जलकुंड आ स्वच्छ वातावरणक कारण भक्तजनक संख्या दिन प्रति दिन बढ़ैत जा रहल अछि।

मुख्यमंत्रीक दर्शन, पर्यटनिक संभावना के संकेत

साउन महिनाक तेसर सोमबार, अर्थात् आजुक दिन, मधेश प्रदेशक मुख्यमंत्री शतिश कुमार सिंह स्वयं टूटेश्वरनाथ मंदिर पहुँचि विधिपूर्वक दर्शन कएलनि। हुनकर ई औपचारिक उपस्थिति के धार्मिक पर्यटन प्रवर्द्धन सं जोड़िकऽ देखल जा रहल अछि।

मुख्यमंत्री संग मंदिर दर्शन में सहभागी नेपाल होटल आ पर्यटन व्यवसायी महासंघ मधेश प्रदेशक अध्यक्ष हिरालाल गौतम कहलनि, “ई मंदिर धरमी आस्था के केन्द्र मात्र नै, बल्कि प्रदेशक पर्यटन विकास लेल एक ‘हेरिटेज गेटवे’ बनि सकैत अछि।”

ओतहि बर्दिवास नगरपालिका–५ के वाड अध्यक्ष काहारमान स्याङवा कहलनि, “हमर टूटेश्वरनाथ मंदिर में हरेक साउन सोमबार हजारों श्रद्धालु अबैत छथि। प्रदेश सरकार एतबा धरमी महत्व के चिन्हए, आ आब एकरा पर्यटनिक क्षेत्रक रूप में विकसति करय, तकर हम सब अनुरोध करैत छी।”

मेला आ पर्व में धार्मिक जनसँख्या के भीड़

टूटेश्वरनाथ महादेव मंदिर में साउन सोमबार मात्र नै, बल्कि हरितालिका तीज, महाशिवरात्रि, एकादशी, चतुर्दशी जेकाँ पर्व में सेहो भारी संख्या में दर्शनार्थी अबैत छथि। सिरहा, धनुषा, सर्लाही, बारा, रौतहट आदि पड़ोसी जिलासँ लऽ कऽ सीमावर्ती भारतीय शहरसभ सं सेहो भक्तजनक उल्लेखनीय उपस्थिति देखल जाइत अछि।

मंदिरक शिखर वास्तुकला, पौराणिक इतिहास, हरियाली आ शांति स भरल वातावरण एकरा धार्मिक पर्यटन लेल उपयुक्त स्थल बनबैत अछि।

धरमी भावना संग-संग विकासक माँग

हाल धरि मंदिरक सम्पूर्ण प्रबंधन स्थानीय लोकक सक्रियता आ भक्तजनक भाकल पर आधारित रहल अछि। धार्मिक पर्यटन के बढावा देबय लेल सड़क, सुगम पार्किंग, धर्मशाला, पाटी–पौवा, जलपान गृह, शौचालय आदि आधारभूत पूर्वाधार के आवश्यकता अछि—एहना स्थानीय लोकनि कहैत छथि।

मुख्यमंत्रीक हालक भ्रमण सं स्थानीय लोकनि में आशा जन्मल अछि—शासन प्रशासनक ध्यान आब ई स्थल दिस बढ़त आ ई एक नव मोड़ पर पहुँचत।

टूटेश्वर : धरमी मात्र नै, अवसरक आधार

धरमी आस्था, पौराणिक कथा, प्राकृतिक सौंदर्य आ सामाजिक सौहार्द्र सं भरल टूटेश्वरनाथ मंदिर आब साँच्चिकेँ मधेश प्रदेशक एक गौरवशाली धरमी–पर्यटनिक गन्तव्य बनबाक संभावना रखैत अछि।

सरकारक लगानी, समुदायक सहभागिता आ योजनाबद्ध विकास सं ई स्थल धार्मिक पर्यटनक एक मॉडल बनि सकैत अछि, जे प्रदेशक सामाजिक–आर्थिक उन्नयन में सेहो महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकैत अछि।

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