सुनकोशी–मरिन डाइभर्सनः ‘राष्ट्रिय गौरव’क सपना अधूर, मधेस मे अबहुँ पियासे पियासे

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आज्ञा खबर
सिन्धुली

मधेसक सिंचाई, पीय जल आ ऊर्जा क्षेत्र मे ऐतिहासिक बदलाव आनय वला सपना लऽ कऽ बनल सुनकोशी–मरिन डाइभर्सन बहुउद्देश्यीय योजना आइयो ‘राष्ट्रिय गौरव’क बैनर तर नीचे अल्झल छै। सात वर्ष पहिने निर्माण शुरू भेल रहय, मुदा आइ धरि ई योजना अपन लक्ष्यक आधा रस्ता तकहूँ पूरा नै कऽ सकल अछि – ओहो धीमा गति सं।

सिन्धुली जिलाक सुनकोशी गाउँपालिका–८, ढुङ्ग्रेबाँस (खुर्कोट) सं शुरू भऽ कऽ कमलामाई नगरपालिका–२ स्थित मरिन नदी तक बनय वला ई आयोजना मे १३.३१६ किलोमीटर सुरंग मार्गक निर्माण पूर भऽ चुकल अछि, मुदा तकरा बाद काजक गति थमकल देखाइत अछि। सम्पूर्ण भौतिक प्रगति ३६.८३ प्रतिशत पर अटल रहल अछि।

२०७६/७७ साल मे शुरू भऽ १० वर्ष मे पूर्ण करबाक लक्ष्य रखने ई आयोजनाक दोसर चरण माघ २०७९ सं शुरू भेल रहय। मुदा आइ धरि मात्र १०.१३ प्रतिशत काज भेल अछि। पटेल–रमण जेभी प्रा.ली. द्वारा निर्माणक जिम्मा लेल गेल ई चरणक सुस्त प्रगतिपर सरकारी स्तर सं सेहो चिन्ता जताओल जा रहल अछि।

शनिदिन मधेस प्रदेशक मुख्यमंत्री सतीशकुमार सिंह, भौतिक पूर्वाधार मंत्री सरोजकुमार यादव, ऊर्जा आ सिंचाई मंत्री शेषनारायण यादव लगायतक टोली स्थल पर पहुंचि कऽ स्थलगत निरीक्षण कएलन्हि।

मुख्यमंत्री सिंह कहलन्हि, “पानीक घोर अभाव झेलि रहल मधेसक लेल ई योजना एकटा आशाक दियो थिक। मुदा आइ देखायल सुस्ती त निराशाजनक अछि।”

प्रदेश सरकार आयोजनाक प्रगति आ समस्यासभक रिपोर्ट केन्द्र सरकार के औपचारिक रूप सं बुझेबाक तैयारी मे अछि।

चाइनीज कम्पनी चाइना ओभरसीज इन्जिनियरिङ ग्रुप द्वारा सम्पन्न भेल पहिल चरणक तुलना मे दोसर चरणक गति बहुत धीमा देखाइत अछि। पूर्वप्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली द्वारा विशेष रुचि देखाओल गेल ई आयोजनाक सम्झौतामे पुनरावलोकनक आवश्यकता स्पष्ट रूप सं देखाइत अछि।

मंत्री सरोजकुमार यादव चेतावनी देलन्हि, “समय पर सम्झौता पालन नै भेल त सम्झौता रद्द कऽ विकल्प खोजबाक स्थिति आबि सकैत अछि।”

कुल लागत ४९ अर्ब ४२ करोड ३१ लाख रुपैया होमय वला ई योजना सं मधेस प्रदेशक पाँच जिलामे १ लाख २२ हजार हेक्टर जमीनमे वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराबय के लक्ष्य छै। संगहि ३१.०७ मेगावाट जलविद्युत् उत्पादन करबाक योजना बनल छै।

वरिष्ठ डिभिजनल इन्जिनियर अशोक राज गौतमक अनुसार, आयोजनासं कृषि क्षेत्रमे वार्षिक १० अर्ब ३० करोड आ बिजुलीसं १ अर्ब ५५ करोड रुपैयाक आम्दानी होयब अपेक्षित अछि। हाल धरि ई आयोजनामे खर्च १६ अर्ब ५० करोड सं बेसी भऽ चुकल अछि।

मधेसक कृषि क्षेत्र पानी आ उर्वराशक्तिक अभावमे संकट झेलि रहल अछि। ऐहन अवस्था मे यदि सुनकोशी–मरिन जेकाँ योजना समय पर पूरा भेल, त ई भूगोलमे उत्पादनक क्रान्ति सम्भव छै। मुदा वर्तमान स्थिति देखल जाय त आयोजनाक पूर्णता अनिश्चिते देखाइत अछि।

समय पर पूरा करबाक दबाब बढल अछि, आ प्रदेश नेतृत्व ‘राष्ट्रिय गौरव’ योजनासभ पर अब कार्यान्वयनक जोर दय रहल अछि। स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि आ विशेषज्ञसभक मानना छै जे योजना सफल बनेबाक लेल स्पष्ट समयसीमा, नियमित अनुगमन आ राजनीतिक हस्तक्षेप सं मुक्त कार्यान्वयन जरूरी अछि।

सुनकोशी–मरिन योजना मधेसक खेत-खरिहानमे पानी आनय वला सपना थिक, मुदा ई सपना योजना बनिकऽ बरखों सं झूलि रहल अछि। यदि आबो जिम्मेवारीक बोध, राजनीतिक प्रतिबद्धता आ प्रशासनिक सक्रियता देखाओल नै गेल, त ई योजना ‘गौरव’क नाममे सीमित रहि जाएबक खतरा आरो पैघ भऽ रहल अछि।

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