डा. वाग्लेकेँ जोर – मधेशक खस्सी समस्या स्थायी दृष्टिकोण सँ समाधान करबाक चाही

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आज्ञा खबर
धनुषा
राष्ट्रिय स्वतन्त्र पार्टी (रास्वपा) केर उपसभापति डा. स्वर्णिम वाग्ले कहलनि जे मधेशमे फैल रहल खस्सीक दीर्घकालीन समाधान अत्यन्त जरूरी अछि।

धनुषाक हंसपुर नगरपालिकास्थित खस्सीग्रस्त खेत क्षेत्रक रास्वपाक प्रवक्ता मनिष झासँ संगे संयुक्त अवलोकन भ्रमणक क्रममे डा. वाग्ले कहलनि जे ई समस्या केवल मधेशक नहि, संपूर्ण देशक समुन्नतिक दृष्टिकोण सँ सेहो गंभीर विषय थिक। ओ कहलनि जे सुनकोशी–मरिन डाइभर्सन योजना एहि क्षेत्रक लागि अत्यन्त महत्वपूर्ण अछि।

“जतए पहिने धानक हरियाली देखाइ दैत छल, ओहि खेत सभ आब उजड़ल देखाइ दैत अछि। बीया तक सुकि रहल अछि। ई परिस्थिति जलवायु परिवर्तन, चुरेक अति दोहन, पारंपरिक जलस्रोत संरक्षण पद्धतिक नाश आ आधुनिक जीवनशैलीक प्रभावक कारण भेल अछि,” डा. वाग्ले कहलनि।

ओ कहला जे तत्काल राहतक रूपमे डिप बोरिंग आ कृत्रिम वर्षा (क्लाउड सिडिङ) जेकाँ विकल्पपर बहस भ’ रहल अछि, मुदा ई समस्या लेल स्थायी समाधान अनिवार्य अछि।

‘सुनकोशी–मरिन’ योजना – राष्ट्रिय कृषि रूपान्तरणक आधार

डा. वाग्ले कहलनि जे मधेशक दीर्घकालीन जल समस्या समाधान लेल सुनकोशी–मरिन डाइभर्सन योजनाकेँ राष्ट्रिय प्राथमिकताक रूपमा ल’ क’ अगाडि बढ़ेनाई आवश्यक अछि।

“सुनकोशी नदीक पानि केँ १३–१४ किलोमीटर सुरंगसँ मरिन खोलामे उतारिक’ धनुषा, महोत्तरी, रौतहट आ सर्लाही जिलामे लगभग १ लाख २२ हजार हेक्टेयर जमीनमे सिँचाइ सुविधा पुरा करबाक योजना अछि,” ओ कहलनि, “मुदा सुरंगमे ब्रेक–थ्रु भ’ चुकलाक बादो बाँकी संरचनात्मक काज अत्यधिक ढिलाईसँ भ’ रहल अछि। एहन अवस्थामे तत्परताक आवश्यकता अछि।”

ओ कहला जे सिँचाइक उचित व्यवस्था भेला सँ खेतीमे क्रान्ति सम्भव अछि। भारत आ बंगलादेशक किछु क्षेत्रक उदाहरण दैत ओ कहलनि जे ओतए सिँचाइक बलपर हरित क्रान्ति संभव भेल अछि।


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