आज्ञा खबर
बर्दिवास
देशक ‘अन्न भण्डार’ मानल जाएवाला तराई–मधेस आब सुखाड़ संकटमे फँसल छै। वर्षाकालक मध्य भाग आबि चुकल अछि, मुदा पर्याप्त बरखा नञि होए सँ धानक रोपनी पर गम्भीर असर पड़ल छै। जतऽ–ततऽ रोपनी भेल खेत सेहो तेज धूप आ पानीक अभावमे चिरा फाटल देखाइ दैत छै, रोपल धान सुखाए लगल छै।
मधेस प्रदेशक धनुषा, महोत्तरी, सर्लाही, रौतहट आ बारा जिल्हामे रोपनीक अवस्था काफी चिन्ताजनक छै। किसान लोकनि खेतमे पानी नै, बल्कि सुखाएल माटिक चिरा देखि निराश छथि।
मधेस प्रदेश कृषि विकास निर्देशनालयक वरिष्ठ बागवानी विकास अधिकृत प्रदीपकुमार यादवक कहब छै जे गत वर्षक तुलना मे एहन खराब स्थिति पहिने कहियो नञि देखल गेल। “सावनक दोसर सप्ताह चलि रहल छै, मुदा एखन धरि केवल ५१ प्रतिशत क्षेत्रमे मात्र रोपनी सम्पन्न भेल छै,” ओ कहलनि।
निर्देशनालयक अनुसार कुल ३ लाख ७२ हजार हेक्टर खेतीयोग्य जमीनमे सँ केवल १ लाख ९३ हजार हेक्टरमे रोपनी भेल छै। “कतौ कतौ तऽ रोपल धान सेहो सुखि गेल छै,” यादव कहलनि। “सिंचाईक सुविधा नै होएबाक कारण खेत चिरा फाटि रहल छै।”
धनुषा आ महोत्तरीमे ३५ प्रतिशत, सर्लाहीमे ५६ प्रतिशत, रौतहटमे ६८ प्रतिशत आ बारामे मात्र ८० प्रतिशत रोपनी सम्पन्न भेल छै।
सुनकोशी मरिन योजना: आशाक उजास, कार्यान्वयनक अन्हार
दीर्घकालीन सिंचाई समाधानक उद्देश्यसँ शुरू भेल सुनकोशी मरिन डाइभर्सन बहुउद्देश्यीय योजना वर्षा आधारित खेतीसँ राहत देबाक उम्मीद दैत एलनि, मुदा ओ योजना कछुआ चालसँ आगाँ बढ़ि रहल छै।
वि.सं. २०७३/७४ मे उद्घोषित ई योजना धनुषा, महोत्तरी, सर्लाही, रौतहट आ बाराजिल्हामे कुल १ लाख २२ हजार हेक्टरमे वर्षभरि सिंचाई देबाक योजना लऽ कएल गेल छल। मुदा, मुख्य ढाँचा—बाँध निर्माण—एखनहुँ अत्यन्त धीम गति पर छै।
योजनाक निर्देशक बद्री कार्की कहलनि, “१३.३ किलोमीटर सुरंग १५ मास पहिने पूर्ण भऽ चुकल अछि। मुदा ३० मासमे बाँध निर्माण मात्र १० प्रतिशत पूरा भेल छै।”
ई निर्माण रमण–पटेल जेभी कम्पनी द्वारा कएल जा रहल छै, जे १२ अर्ब ५१ करोड़क ठेका लऽ चुकल छै। मुदा ओतऽ पर्याप्त स्रोत–साधन नै लगेलाक कारण कार्य स्थगित भऽ रहल छै।
“जाड़ामे जे काज हेबाक चाही ओ नै भेल, आब वर्षाकालमे काज असम्भव छै,” कार्की कहलनि। ओ कहलनि जे १ अर्बसँ बेसी भुक्तानी कएलाक बावजूद कम्पनी काज नै बढ़ौने अछि।
किसानक रूएलाक बाद प्रशासन जागल
बाराक प्रमुख जिल्ला अधिकारी वसन्त अधिकारी सेहो कहैत छथि—“सिंचाईक दीर्घकालीन समाधानक लेल सुनकोशी मरिन योजना अनिवार्य छै। मौसमीय अनियमितता आ बारम्बार सुखाड़ अवस्थाक समाधान एकर माध्यमसँ संभव अछि। मुदा योजना निर्माण अधरमे अटकल छै।”
निर्देशक कार्कीक अनुसार निर्माण कम्पनीक ढिलासुस्ती विरुद्ध मन्त्रालय आ विभागमे कई बेर पत्राचार कएल गेल छै। “राष्ट्रिय गौरवक आयोजना कहाएबाला योजना एहेन स्थितिमे अछि तऽ दोसर योजनाक की हाल होएत?” ओ पुछैत छथि।
भविष्यक संभावना आ जोखिम
ई आयोजना सफल भेलासँ ३१.०७ मेगावाट विद्युत उत्पादन, पाँच जिल्हामे सिंचाई विस्तार, नगद फसलक प्रवर्द्धन आ कृषि उत्पादन वृद्धि संभव भऽ सकैत छै। संगहि, तामाकोशी–सुनकोशी क्षेत्रमे पर्यटन, माछ पालन आ जलाशय व्यवस्थापनमे नव अवसर सृजना होएत।
मुदा वर्तमान निर्माण गति देखिकऽ ई सपना एखन धरि बहुत दूर लागैत अछि।
जहँ मधेसक किसान धान रोपिकऽ आकाश दिस आशासँ तकैत छथि, तहँ सरकारक बहुप्रतीक्षित योजना प्रशासनिक ढिलासुस्ती आ ठेकेदारक निष्क्रियतामे अटकल छै।
प्रश्न उठैत अछि—देशक खाद्य सुरक्षाक मेरुदण्ड मानल जाएबाला मधेसक खेत सुखाएल चिरा रोकबा लेल सरकार सजग बनत कि फेर कतेको बरख प्रतीक्षामे बितत?





































