आज्ञा खबर
बर्दिबास
तराई–मधेशक विभिन्न भाग सभमे अन्धाधुन्ध ढंग सँ ‘डीप बोरिङ’ खनल जा रहल अछि, जाहिसँ भूमिगत जलस्रोत पर गंभीर संकट उत्पन्न होयबाक संभावना पर विशेषज्ञ लोकनि चेतावनी देने छथि। ओ लोकनि के कहब अछि जे बिना दीर्घकालीन जलस्रोतक संरक्षण के ध्यान मे रखने, जेना-तेना बोरिङ खनबाक प्रवृत्तिसँ पर्यावरणीय सन्तुलन पर गम्भीर असर पडल अछि।
प्रधानमन्त्री केपी शर्मा ओली हालहि सिंचाइ समस्या समाधानक नाम पर तत्काल ५०० टा ‘डीप बोरिङ’ करबाक निर्देशन देलनि। मुदा, एकर प्रति जल तथा वातावरण विशेषज्ञ सभ चिन्तित छथि।
पहिने अध्ययन, तकर बाद समाधान
विपद् अध्ययन केन्द्र तथा इन्जिनियरिङ अध्ययन संस्थानक निर्देशक डा. वसन्त अधिकारी के अनुसार, तराई क्षेत्रमे बोरिङ खनबा स पहिने ओहि ठामक पानीक पुनर्भरण क्षमता आ जलस्रोतक संरचनासँ जुड़ल वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी अछि।
“तराईक पानीक रिचार्ज प्रक्रिया, जलक स्रोतक स्थिति, सूखल इलाकाक अवस्था आ कुन गहिराइ धरि ट्युबेल प्रभावी होइछ—एकर समुचित ज्ञान बिना जे बोरिङ भ’ रहल अछि, से दीर्घकालीन समाधान नै छी,” डा. अधिकारी कहलनि। “अहिलेसम्म जे किछु अध्ययन भेल अछि, ताहिमे सेहो भूमिगत जलक सटीक अवस्था स्पष्ट नै भ’ सकल अछि।”
ओ कहैत छथि जे जलवायु परिवर्तन सँ उत्पन्न असर केँ ध्यानमे राखि कऽ संघीय तथा प्रदेश सरकार द्वारा एकीकृत दृष्टिकोणसँ जलस्रोत प्रबंधन होयबाक आवश्यकता अछि।
पुरान बोरिङ फेल — चुरे विशेषज्ञक चेतावनी
चुरे क्षेत्रक जल-पर्यावरण विशेषज्ञ भोला भट्टराई सेहो चेतावनी दैत छथि जे ठोस अध्ययनक अभावमे जतेक बोरिङ होइछ, ओ संकट केँ आर गहिर करि रहल अछि। ओ कहैत छथि जे विगतमे खनल गेल लगभग ७० प्रतिशत ‘डीप बोरिङ’ आब पानी निकालबा मे असमर्थ भ’ चुकल अछि।
“हमरासभ लग कुन ठामक कुन तह पर पानीक सतह अछि, एकर कोनो विस्तृत डाटाबेस नै अछि,” भट्टराई कहलनि। “तराईमे सूखल देखाइ देला पर जतासं बोरिङ कएल जाइत अछि, मुदा एकर समाधानक बदला नव संकट उत्पन्न होइबाक खतरा बेसी अछि।”
ओ कहैत छथि जे राष्ट्रपति चुरे–तराई–मधेश संरक्षण विकास समितिक २० वर्षक दीर्घकालीन योजनाक प्रभावकारी कार्यान्वयन सँ जलस्रोत, जैविक विविधता आ चुरे क्षेत्रक संरक्षण संगहि समुदायक आजीविकामे सेहो ठोस सुधार आयब संभव अछि।
सिंचाइ मन्त्रालयक रिपोर्ट — प्रभावहीन बोरिङ
मधेश प्रदेशक विभिन्न जिलाक अवलोकन कएल एक मंत्रालयस्तरीय टोली अपन रिपोर्टमे हालहि खनल गेल बोरिङ प्रयासकेँ प्रभावहीन बतौलनि। रिपोर्ट अनुसार, चालू आर्थिक वर्षक चैत महिनासँ ल’ क’ आब तक लगभग ३०० टा ‘डीप बोरिङ’ खनल गेल, मुदा अधिकांश प्रभावकारी रूपेँ सञ्चालनमे नै आबि सकल।
तात्कालिक राहतक नाम पर दीर्घकालीन संकट नै बनय
विशेषज्ञ लोकनिक कहब अछि — तराई-मधेशमे सिंचाइ आ पीनेल जलक समस्या केवल तत्काल राहतक माध्यमसँ समाधान नै भ’ सकैत अछि। दीर्घकालीन दृष्टिसँ नीति निर्माण जरूरी अछि। भूगर्भीय, जलवायु तथा सामाजिक संरचनाक सम्यक ज्ञानक आधार पर नव कदम उठाए पड़त, नहि तँ भविष्यमे भूमिगत पानीक कमी खेतीबारी मात्र नै, बल्कि जनजीवनक संपूर्ण संरचनाकेँ संकटमे पाड़ि सकैत अछि।





































