आज्ञा खबर
जनकपुरधाम
मिथिला क्षेत्र साउन शुक्ल तृतीयासँ भक्तिभाव आ सांस्कृतिक रङमे रंगाएल अछि। आइतबार साँझसँ शुरू भेल झुला महोत्सव एखन सम्पूर्ण मिथिलामे उमंग भरि देने अछि। भगवान विष्णु आ लक्ष्मीके प्रतीक मानल जाए वाला राम-सीता आ कृष्ण-राधाकेँ झुलामे झुलौबइ के परंपरासँ ई पर्वक विशेषता देखायल जाइत अछि।
ई पर्व कोनो व्यक्तिगत घर-आँगन धरि सीमित नै रहि, मठ-मंदिर सभमे सामूहिक भजन-कीर्तन, पूजापाठ आ धार्मिक आयोजनाक संग मनाओल जाएत अछि। श्रद्धालु लोकनि विष्णुलक्ष्मीके प्रतिमासभके विशेष रूपसँ सजाओल झुलामे राखिकए, पारंपरिक लोकधुन संग झुला, मलार, कजरी गीत गबैत झुलबैत छथि।
महोत्तरी जिलाक ऐतिहासिक लक्ष्मीनारायण मन्दिर, मटिहानीसँ डोलीमे राखल प्रतिमाके बाजा-गाजाक संग झुलाघर ल’ जाएल गेल, जतऽ विधिवत् झुला महोत्सवक आरंभ भेल। मटिहानीमे विशेष झुलाघर बनाओल गेल अछि, जतऽ महोत्तरी आ सीमावर्ती भारतक मठ-मंदिर सभसँ आयल प्रतिमासभकेँ झुला झुलाएल जाइत अछि।
साउन शुक्ल तृतीयासँ साउन पूर्णिमासम्म चलनिहार ई पर्व जनकपुरक जानकी मन्दिर आ मटिहानीक लक्ष्मीनारायण मठमे विशेष भव्यताक संग मनाओल जाइत अछि। श्रद्धालु लोकनि भोरसँ रातिसम्म भजन-कीर्तनमे रमि झुला हल्लेबैमे सक्रिय रहैत छथि।
मिथिला क्षेत्रक सांस्कृतिक चिन्तक ध्रुव रायक अनुसार, ई पर्व अवधक अयोध्या आ वृन्दावनसँ मिथिलामे आयल मानल जाइत अछि। जनश्रुतिक अनुसार, सन्त सुरकिशोर दास द्वारि विक्रम संवत् १७८७ तिर मटिहानीमे एहि पर्वक आरंभ कैल गेल छल। जनकपुरधाम, सीता मायाक मायके ठाम होय के कारण, मैथिल परंपरामे ज्वाइँ रामकेँ प्रसन्न करबाक लेल झुला महोत्सव विशेष महत्व राखैत अछि।
जनकपुरक मणिपर्वत क्षेत्र सेहो झुला पर्वसँ जुड़ल मानल जाइत अछि। जनक द्वारा राम-सीता विवाहमे दाइजो स्वरूप देल गेल हिरा-रत्नसभसँ बनल ढेरी मानल जाएवाला एहि पवित्र स्थलपर साउन शुक्ल तृतीयाक दिन विशेष पूजा अर्चनासँ पर्वक आरंभ करबाक परंपरा रहि आएल अछि।
पर्वक समापन साउन पूर्णिमाक दिन झुलामे बान्हल डोरीके विधिपूर्वक चीरि (काटिकए) कएल जाएत अछि। झुला महोत्सव केवल धार्मिक आस्थाक विषय नै, बल्कि मिथिलाक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत आ सामाजिक एकता केर प्रतीक सेहो अछि।





































