सप्तरीमे खेत सुन्नर, किसानक मुंह सूतल — पानी नै नपड़लसँ रोपनी संकटमे

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आज्ञा खबर
सप्तरी

“आकाश दिसा तकैत खेत जोतनाई में महिनौं बीति गेल, मुदा पानीक कतौ अत्त-पत्त नै छै,” — ई पीड़ा छै तिलाठी कोइलाडी गामपालिका, सप्तरीक किसान रामसागर यादव केर। असार गुजराइते काल पानी नै भेटलासँ हजारौं किसानक सपना संग-संग धानक बिचरो सुखाए लागल छै।

सप्तरी जिलामे नीक समय सँ वर्षा नै भेल आ सिंचाईक भरोसेमंद व्यवस्था नै होइते धानक रोपनी ठप्प भ’ गेल छै। सरकारी आँकड़ा अनुसार, साउनक पहिल सप्ताह धरि मात्र ३२ प्रतिशत रोपनी भेल छै। धानक परंपरागत खेतीमे अग्रमान रहल सप्तरी लेल ई चिन्ताक विषय छै।

दक्षिण भाग सिंचित, उत्तर भाग सूखल

जिलाक १८ टा स्थानीय तहमे सँ, पश्चिमी कोसी नहर सँ सिंचित दक्षिणी क्षेत्र — हनुमाननगर कंकालिनी, तिलाठी कोइलाडी, छिन्नमस्ता आ राजगढ गामपालिकामे लगभग ६० प्रतिशत रोपनी पूरा भ’ चुकल छै, ई जानकारी दैत छै कृषि ज्ञान केन्द्र, सप्तरीक प्रमुख किसुनदेव राउत।

मुदा मध्य आ उत्तर भागक हालत बहुतै खराब छै। कोसी पंप नहर सँ सिंचित क्षेत्रमे ३२ प्रतिशत मात्र रोपनी भेल छै, आ बोरिंग आ मोटरपंप पर निर्भर उत्तर क्षेत्रमे त १५ प्रतिशत मात्र रोपनी भेल छै।

“समग्र रूपमे देखल जाउ त औसतन ३२ प्रतिशत रोपनी भेल छै, जे बहुतै कम छै,” प्रमुख राउत कहैत छैथ।

नै सिंचाई छै, नै राहत

धानक रोपनीक मुख्य समय असार आ साउनक पहिल पख होइ छै। मुदा वर्षा नै होइते आकाशे पानी पर निर्भर किसानक खेत सुखाए लागल छै। कतेको किसान बोरिंग सँ सिंचाई क’ रोपनी कएलक, मुदा धानक बिउ सुखल जाइत छै।

पिछला वर्ष सप्तरीमे २ लाख ७४ हजार मेट्रिक टन धानक उत्पादन भेल छल। मुदा एहेन मौसममे उत्पादनक भारी गिरावट होयब तय मानल जा रहल छै। कुल ८१ हजार हेक्टर खेती योग्य जमीनमे सँ ६८ हजार हेक्टरमे धान रोपनी होइत आयल छै, मुदा वर्तमान स्थिति खाद्यान्न संकटक खतरा बढ़ा रहल छै।

सरकारक घोषणा, किसानक भरोसा नै

मधेश प्रदेश सरकार असार २६ गते मधेश क्षेत्र केँ सूखाग्रस्त घोषित कएलक, मुदा ओकर प्रभाव किसान धरि पहुँच नै पएलक। किछु ठाम पर पेयजल वितरण भेल छै, मुदा कृषक लेल राहत योजना आ वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था अदृश्ये छै।

मुख्यमंत्रीक प्रेस सल्लाहकार अवधेश झा कहैत छैथ — “सरकार विशेषज्ञ संग विचार विमर्श क’ रहल छै। साउन १५ धरि यदि पानी नै बरसल त वैकल्पिक बाली आ राहत पैकेज हेतु संघीय सरकार संग समन्वय करबाक तैयारी भ’ रहल छै।”

मुदा किसान त घामक ताप आ सुक्खा हावामे खेत दिस ताकैत बैठल छैथ। ओ कहैत छैथ — “जँ योजना कागज परे सीमित रहत त संकट के रोकब असंभव छै।”

कृषिपर आधारित अर्थतंत्र संकटमे

सप्तरी जिलाक अर्थतंत्रक मेरुदंड छी धान। ई न केवल आत्मनिर्भरता देत छै, बल्कि बहुत परिवारक जीविकोपार्जन सेहो यैह पर निर्भर छै। एहन परिस्थितिमे जँ धान नै भेल त खेती आधारित जीवनशैली, बाजार, खाद्य सुरक्षा सहित पूरा संरचनापर प्रभाव पड़ब तय छै।

सप्तरी मात्र नै, मधेश प्रदेशक अन्य जिलासभक हालत सेहो एहि तरहक छै। वर्षा अभाव समग्र मधेश केँ खाद्य असुरक्षाक डगर दिस धकेलि रहल छै।


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