मधेसमे रोपनी पर असर, प्रदेश सरकारके पहल पर तकनीकी टीम भेजल जायत

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आज्ञा खबर
बर्दिवास

मधेस प्रदेशमे लम्बा समय से पड़ल सुखाड़िक कारण धानक रोपनी बड़का स्तर पर प्रभावित भेल अछि। एहि संकटक गंभीरताके देखैत प्रदेश सरकार स्थलगत अध्ययन लेल तकनीकी टीम भेजबाक निर्णय केलक अछि।

शुक्रदिन कृषि आ पशुपालन विकास मंत्री रामनाथ अधिकारीक अध्यक्षतामे भेल मंत्रालय स्तरक बैठकमे मधेसक आठो जिलामे तकनीकी टीम पठेबाक निर्णय लेल गेल। मंत्रालयक अनुसार, वर्तमान संकटक मूल्यांकन, समस्या समाधानक तात्कालिक आ दीर्घकालीन उपायके चिन्हित करबाक उद्देश्यसँ ई टीम पठाउल जायत।

मंत्री अधिकारी आइतवारसँ टीमके खटेबाक निर्देशन देने छथि। हुनकर अनुसार, “अगर आबो किछु दिनमे वर्षा नै भेल, त तीनै तहक सरकार मिलिकय विकल्प खोजब जरूरी होयत।” ओ मंत्रालयक अधीन रहै वाला समस्त निकायके तैयार रहबाक आदेस सेहो देने छथि।

टीममे संघीय सरकार प्रत्येक जिलामे केन्द्रसँ दुइ-दुइ गोटे तकनीकी विशेषज्ञ पठेत। ई टीम संबंधित जिलामे प्रदेश सरकारक अधीन चलैत कृषि आ सिचाई कार्यक्रमसभसँ समन्वय करैत समस्या के सही जानकारी संकलन करत।

मधेस प्रदेश सरकार पहिने सँ जलस्रोतक चरम अभाव, धान रोपनीमे देखल गेल गंभीर समस्या आ पेयजल संकटके कारण प्रभावित क्षेत्रसभके ‘सुखाड़ पीड़ित’ घोषित क’ चुकल अछि।

सिचाई अभावक कारणे आब धरि मधेसक आठ जिलामे केवल लगभग ४६ प्रतिशत रोपनी सम्पन्न भेल अछि। प्रदेशक कृषि मंत्रालयक रिपोर्ट अनुसार, विगत वर्षसभमे एहि समय तक ८० प्रतिशत सँ बेसी रोपनी पूरा भ’ जायत छल।

मंत्री अधिकारीक अनुसार, आब सिचाई लेल उपलब्ध संरचनासभके पूर्ण क्षमतामे उपयोग करबाक, वैकल्पिक जलस्रोत (जैसे– बोरिंग, सिचाई पोखरी, नाला-पाइप तकनीक आदि) के संभाव्यता अध्ययन करबाक आ आवश्यक होय त आपातकालीन हस्तक्षेप कार्यक्रम लाबय के तैयारी होइत अछि।

प्रदेश सरकार संघीय सरकारसँ सेहो आवश्यक सहयोग मांगबाक तैयारीमे अछि। मंत्री अधिकारी कहलनि जे, “संघीय सरकार बेमौसम आपदा प्रबंधन लेल पहिले सँ बजट विनियोजन क’ चुकल अछि, आब ओ बजटक उपयोग मधेसक संकट समाधानमे होयब जरूरी अछि।”

हालाँकि प्रदेश सरकार संकट समाधान लेल सक्रियता देखबैत अछि, विशेषज्ञ लोकनिक चेतावनी अनुसार यदि वर्षा नै भेल त खाद्य संकट सेहो गंभीर रूप ल’ सकैत अछि।

आब आगाँ के किछु दिनक मौसमी स्थितिक संग-संग नीति आ कार्यान्वयनक प्रभावकारितो मधेसक किसानसभक भविष्य तय करत।

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